कौशाम्बी में अंबेडकर जयंती पर विधिक जागरूकता शिविर, अधिकारों पर जोर

Tue 14-Apr-2026,05:21 PM IST +05:30

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कौशाम्बी में अंबेडकर जयंती पर विधिक जागरूकता शिविर, अधिकारों पर जोर Kaushambi-Ambedkar-Legal-Awareness-Camp
  • कौशाम्बी में अंबेडकर जयंती पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, जिसमें संविधान, बाल अधिकार, महिला अधिकार और पॉक्सो एक्ट पर विस्तृत जानकारी दी गई।

  • कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देकर लोगों को अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनने का संदेश दिया गया।

Uttar Pradesh / Kaushambi District :

kaushambi/ दिनांक 14.04.2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कौशाम्बी के तत्वावधान में राव पैलेस, करन चौराहा, सराय अकिल, चायल कौशांबी में राष्ट्र निर्माता, संविधान शिल्पी भारत रत्न बाबा साहब  डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयन्ती के अवसर पर भारतीय संविधान के बारे में जागरूकता, यौन अपराधों से बच्चों का सरंक्षण अधिनियम-2012, शोषण के विरुद्ध अधिकार, लैंगिक समानता, नशा मुक्त भारत एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

शिविर की शुरुआत बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के संविधान की रचना करने, समाज सुधार और कमजोर वर्गों के उत्थान में अतुलनीय योगदान के लिए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर हमेशा याद किए जाएंगे। 

भारतीय संविधान भारत के सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय सुनिश्चित करने वाला सर्वोच्च कानून है, जो जाति, धर्म, लिंग या जन्म स्थान आदि के भेदभाव के बिना सभी को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। भारतीय संविधान सरकार को समस्त नागरिकों के   मानवाधिकार, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। साथ ही सरकारी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद करता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की जानकारी दी गई। बाल अधिकार और शोषण के विरुद्ध बालकों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अधिवेशन, किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम और राष्ट्रीय बाल नीति आदि के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे (बालक एवं बालिका दोनों) को बालक माना गया है।

बच्चों को मारना, चिढ़ाना, मजाक करना, मजदूरी करवाना, उनके साथ छल करना, उनकी बात अनसुनी करना, अश्लील चित्र या किताब दिखाना, भद्दे इशारे करना, गाली-गलौच करना, डराना-धमकाना, तंग करना व बलात्कार आदि जैसे कृत्य अपराध की श्रेणी में आते हैं। बाल अधिकारों के हनन को रोकने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में शोषण के विरूद्ध अधिकारों का प्रावधान हैं।

अनुच्छेद 45 में बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। बाल मज़दूरी (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के किसी बच्चे को किसी कारखाने या खदान में काम नहीं लगाया जा सकता। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट) के तहत, बालक के लिए मित्रतापूर्ण वातावरण बनाए रखने का प्रावधान है।

पीएलवी ममता दिवाकर ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि  भारतीय संविधान महिलाओं को समानता, गरिमा और भेदभाव रहित जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। संविधान महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा देता है और समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने के लिए सकारात्मक भेदभाव (सशक्तीकरण) की अनुमति देता है।

संविधान महिलाओं को सशक्त बनाने, लैंगिक असमानता को दूर करने और समावेशी समाज बनाने का एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। भारतीय संविधान महिलाओं को संपत्ति रखने की स्वतंत्रता प्रदान करने के साथ ही संपत्ति पर उनके स्वामित्व और अधिकार को भी  सुनिश्चित करता है। भारतीय संविधान महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन को बनाए रखने के लिए उन्हें मातृत्व अवकाश और अन्य बहुत से अधिकार प्रदान करता है।

पी एल वी ज्योत्सना सोनकर ने महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पांसरशिप योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना आदि के बारे जानकारी प्रदान किया। चेयरमैन राव इंस्टीट्यूट एवं राव पैलेस तथा प्रदेश अध्यक्ष संत शिरोमणि रविदास पीठ, कड़ा धाम श्री शरद राव जी ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर भारतीय समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर दलितों, शोषितों, महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों के सबसे मुखर समर्थक थे।

उन्होंने संवैधानिक, सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों के माध्यम से इन वर्गों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, जिससे वे आधुनिक भारत के निर्माता बने  उन्होंने जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी और सदियों से वंचित, शोषित वर्गों को सामाजिक समानता और सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष किया।  कार्यक्रम का संचालन पीएलवी अमरदीप दिवाकर तथा धन्यवाद ज्ञापन पीएलवी कृष्ण चन्द्र चौधरी ने दिया। शिविर में पैरा लीगल वालंटियर डॉ. नरेन्द्र दिवाकर, ममता दिवाकर, अमरदीप दिवाकर, ज्योत्सना सोनकर और कृष्ण चंद्र चौधरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

रिपोर्ट - अमरदीप दिवाकर (PLV)
           जिला विधिक सेवा प्राधिकरण    
            कौशाम्बी